मां भगवान होती है
मां की छाती से
लिपट कर दूध पी रहा ये अबोध बालक जब होश संभालेगा, तब शायद इसे अपनी मां की महानता
का रत्तीभर अंदाजा लग पाए।
महान शब्द की शुरुआत म से शायद इसीलिए होती होगी
क्योंकि म से हम सभी के जीवन का पहला शब्द मां बनता है। वो शब्द जिसकी बदौलत हम
सभी का अस्तित्व है।
सुबह के अखबार में
पढ़ी ये खबर शायद आप सभी की निगाह तक न पहुंच पाई हो। पर मेरी आंखों में आंसू
तड़के ही ले आई। वैसे तो बेहद इमोशनल हूं और शायद इसीलिए हर ऐक्शन और रिऐक्शन पर
नजर रहती है। पर आज एक बार फिर अपनी मां को गौर से काम करते हुए देखता रहा इस खबर
के बाद।
बुंदेलखंड के दमोह
में रेलवे ट्रैक के बगल में एक लाश मिली। रेलवे ट्रैक के बगल में लाश मिलने की खबर
कोई नई नहीं। पर वाकया आत्मा को झकझोर देने वाला है। लाश जैसा कि आप फोटो में देख
सकते हैं, एक महिला की है। पर ये महिला एक सुपरमॉम थी। हर मां एक सुपरमॉम होती है।
अंदाजा लगाया जा
रहा है कि ये महिला शायद रेल से उतरते वक्त गिर गई। गिरते वक्त शायद कोई घातक
गुमचोट लगी। जिसके चलते बाद में महिला की मौत हो गई। पर मां की महानता देखिए, कि
अपने आखिरी लम्हों में भी उसे अपने बेटे की चिंता थी। मरते हुए उस मां ने अपने
दुधमुंहे बच्चे को स्तनपान कराया और हाथ में बिस्किट का पैकेट खोलकर पकड़ा दिया।
ये बच्चा इस रेलवे ट्रैक के पास अपनी मां से चिपटा दूध पीता मिला।
सोचिए, इतनी बुरी
तरह से चोटिल इस मां के दिमाग में खुद को बचाने की कोशिश करने के विचार से पहले
अपने बेटे की सेफ्टी की योजना सूझी। बच्चा अबोध है, इसीलिए अगर ऐसे ही छूट जाता,
तो शायद अगली ट्रेन की चपेट में आ सकता था। इसीलिए मां ने उसे दूध पिलाना शुरू कर
दिया। त्याग और प्यार की मिट्टी से बनी मां का शरीर जरूर मिट्टी हो गया। लेकिन
आत्मा जरूर मेरे महादेव के पास गई होगी। क्योंकि मेरी मां पार्वती का अंश अपने
सर्वोच्च कर्म को कर चुका है। जिसके लिए मोक्ष से कम कुछ बनता नहीं है।
मेरी लिखी एक कविता
जो मेरे जहन में हमेशा रहती है, वो नम आंखों से साझा कर रहा हूं।
जैसे ओउम वैसे
मां.. संपूर्ण
भावनाओं का सागर..
प्यार का अंतहीन
झरना..
भरी भीड़ मे गोद
में एकांत लिए..
मेरी जीत में
आंसुओं का गिरना..
हार में अटूट
विश्वास का वरदान..
सिर्फ सुख का
अहसास..
खुद में समेटे पूरा
संसार..
हर बच्चे का पर्सनल
भगवान..
जैसे ओउम वैसे
मां.. संपूर्ण

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