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जब अपनी हंसी पर रोना आया

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पतला लंबा शरीर.. चाल में हल्की सी लड़खडाहट लिए.. मेरी तरफ पीठ करके वो मेरे बगल वाली गाड़ीवाले से शायद कुछ कह रही थी.. जब मेरी नजर उसपर पड़ी... मैंने अभी उसे देखा ही था.. कि पलक झपकते ही वो काया मेरी तरप मुड़ी... फिर उसके बाद जो मैने देखा.. वो कुछ ऐसा था... फैली हुई लिप्सटिक.. फैला हुआ काजल... हल्का ढ़ला हुआ सा दुपट्टा... आधा मुंह को ढंके, आधा सिर के ऊपर... लड़खड़ाता हुआ वो शरीर मेरी ओर मुड़ा... फिर मेरी कार की खिड़की पर हाथ मारते हुए उसने मुझसे पैसे मांगे.. उसके हाथ में कुछ नोट औऱ भी थे... लेकिन उसकी शक्ल देखकर उस पर दया आने की बजाय मुझे हंसी आ गई.. औऱ ठीक उसी वक्त जब वो मेरी तरफ हसरत भऱी नजरें लिए.. शायद नशे की औऱ हल्की होश की हालत में... मैं इस वेश में किन्नर बनकर धन उगाही के चक्कर में लगे नशे के आदी उस पुरुष की व्यर्थ कोशिश को देखकर अपनी हंसी रोक नहीं पाया... हंसी उसके खुद को किन्नर साबित करने की कोशिश में किए गए फैले हुए उसके मेकअप को लेकर थी.. कनॉट प्लेस में हर रोज कंबलों के नीचे इक्टठा होकर समूह में स्मैक पीने वाले इन नशेड़ियों को देखने वाले आप सब समझ गए होंगे कि ...