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देखिए: यहां है हर इच्छा पूरी करनेवाला पेड़; ऐसे हो जाती है हर मनोकामना सच

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  कल्पवृक्ष.. एक ऐसा पेड़ जिसके नीचे खड़े होकर जो भी मांगो पूरा हो जाता है.. माना जाता है कि इस पेड़ के नीचे अपार सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है.. शायद ये बात जगदगुरू आदि शंकराचार्य को पता थी.. तभी उन्होंने इस पेड़ के नीचे बैठकर 5 सालों तक तपस्या की.. यहीं उन्हें दिव्य ज्ञान की ज्योति प्राप्त हुई.. अब आपके मन में कई सवाल उत्पन्न हो गए होंगे.. कहां है ये पेड़... किसने लगाया... कैसा दिखता है.. तो चलिए लिए चलते हैं आपको उत्तराखंड के पहाड़ों पर... हरिद्वार से श्रीनगर होते हुए चमोली के रास्ते आप पहुंचेंगे जोशीमठ...  बुजुर्ग ने बताया कि ये पेड़ स्वयं देवताओं ने लगाया सही पहचाना आपने.. ज्योतिर्मठ नाम... खराब होते होते.. जोशीमठ हो गया... बद्रीनाथ धाम.. नरसिंह मंदिर इसी जगह हैं... यहीं से फेमस टूरिस्ट स्पॉट ऑली के लिए रास्ता जाता है... और यहीं है.. शंकराचार्य की तपस्थली... तो हमें किसी ने इस जगह के बारे में बताया.. और हम चल दिए.. कल्पवृक्ष के दर्शन करने... यहां मौजूद एक बुजुर्ग ने बताया कि ये पेड़ स्वयं देवताओं ने लगाया.. यहां हमें मिले एक और तपस्वी.. तो ठीक उसी गुफा में तपस्या कर रह...

'घुमै दे', 'कै गौं जानी' और 'स्वीटी' गाने पर देखिए उत्तराखंडी REACTION VIDEOS

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  'घुमै दे' गाना हमें कैसा लगा, बोइ और हम सबका रिऐक्शन एक साथ देखलो। मम्मी और हम सब अलग अलग जेनरेशन के लोग हैं, लेकिन प्रियंका का घुमै दे किसको कैसा लगा ये देखिए। प्रियंका मेहर के गाने आजकल के उत्तराखंडी बच्चों में काफी पॉप्युलर हो रहे हैं। उत्तराखंड की सुनिधि चौहान भी कहा जाने लगा है इन्हें। पर इनका गाना हमें कैसा लगा ये देखिए। नरेंद्र सिंह नेगी जी के गाने सुनने वाले जब एक नई लड़की को गाते सुनते हैं तो कैसा लगता है। आखिर क्यों जिन्हें गढ़वाली खुद अच्छे से नहीं आती वो चाहते हैं कि गानों में सही भाषा इस्तेमाल हो। देखिए हमारे उत्तराखंडी रिएक्शन औऱ बताइए कैसा लगा आपको ये वीडियो... प्रियंका मेहेर एक लेटेस्ट उत्तराखंडी सेंसेशन है। लगभग हर गाने को पसंद करती है जनता बस नीचे लिखे लिंक पर क्लिक करें और देखें प्रियंका के नए गाने पर हमारे रिऐक्शन GHUMAI DE गाने पर UTTARAKHANDI REACTION | घुमै दे PRIYANKA MEHER गजेंद्र सिंह राणा जी का 'कै गौं जानी' गाना KAI GAON JANI | 'कै गौं जानी' गाना सुपरहिट गायक गजेंद्र सिंह राणा जी का गाया हुआ है और इस गाने को सुनकर बोई-बाबा-मौसी को क...

GARHWALI छुंई | मम्मी को मिला जंगल में भालू | मम्मी-पापा-मौसी ने सुनाई आपबीती | #UTTARAKHANDI #VLOG

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बारिश, ठंड और 4 #उत्तराखंडी मिल जाएं तो फिर छुईं तो लगनी ही है। आज मौसी भी आ गई, फिर तो गांव की कहानियां शुरू हो गईं। कैसे मम्मी जब शादी के बाद पहले साल गांव में थीं और लकड़ी काटने जंगल गईं और उन्हें मिल गया रिक यानी भालू? फिर क्या हुआ, मम्मी ने बताया, दादी ने घर आकर उन्हें क्या कहा? पापा मम्मी और मौसी किस स्कूल में पढ़ते थे और फिर गांव से शहर कैसे आए? कई मजेदार किस्से कहानियां आज के इस #VLOG में निकलकर आ गईं। #KOTNALI गांव और #TALEDI गांव में रहती थीं मम्मी और हमारा गांव है #RIKHNIKHAL ब्लॉक में #POKHARU । छोटा सा गांव है हमारा उसके आस-पास हैं #KILBOKHAL , #KHANDWARI और #SILMODI या #SULMODI गांव... आगे वीडियो देखो और कमेंट में बताओ आपको कैसा लगा... देखें वीडियो - GARHWALI छुंई | मम्मी को मिला जंगल में भालू | #UTTARAKHANDI #VLOG दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को कोरोना होने के बाद उत्तराखंड और पंजाब के लोगों को चिंता हो गई है। उनका परेशान होना भी लाजमी है क्योंकि केजरीवाल जी दोनों की प्रदेशों में धड़ाधड़ चुनावी रैलियां करके लौटे और उन्होंने अपने कोविड-19 संक्रमित होने की घोषणा कर...

पत्रकार और मेट्रो वाला प्यार- 3

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उसके आंसू रुक नहीं रहे थे. रह-रहकर अपना मोबाइल चेक कर रही थी. भीड़ भरी मेट्रो में इस कदर रोते हुए, उसे सब देख रहे थे. लेकिन, उसे शायद इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था. या फिर, शायद वो शर्म इतनी कर चुकी थी अपनी जिंदगी में, कि अब आंसू बेशर्म हो चुके थे.  सौ फीसदी इंडियन ब्यूटी, बिंदी और सिंदूर लगाए वो रोते हुए भी बेहद खूबसूरत लग रही थी. ऐसा सिर्फ मुझे ही नहीं लग रहा होगा. इस बात को मैं इत्मीनान से इसीलिए कह सकता हूं. कि जितनी बार उसने यमुना बैंक से आर के आश्रम तक अपने आंसू पोंछने के लिए दुपट्टा उठाया होगा. उतनी ही बार उसे रोते हुए देखता हुआ मैं अपनी बगलें झांकने लगता. इसी दौरान अगल-बगल के सभी लोगों पर जब नजर गई. तो देखा कि हर कोई उसे ही देख रहा है. इस बार उसने रोते हुए अपना पर्स खोला और आंसू पोंछने के लिए अपना रुमाल निकाला. रुमाल कांपते हुए हाथों से फिसल गया और मेरे पैर पर गिरा. मैंने तुरंत रुमाल उठाकर झाड़ते हुए उसे पकड़ाया. भीगी पलकों और काजल से धुले हुए अपने गालों के साथ उसने मुझे देखा और थैंक्स दे मारा. मैं अब भी चुपचाप खड़ा, अपने पत्रकार मन के सवालों को खुद ही आ...

कान के कच्चे राजा की अनसुनी कहानी

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एक बहुत ही पराक्रमी राजा था। राजा हर युद्ध जीतता जा रहा था। राजा का साम्राज्य हर दिन बढ़ता ही जा रहा था। राजा के पराक्रम का यश हर दिशा में फैलता जा रहा था। उसकी सेना का हर सैनिक उसके लिए हर वक्त जान देने के लिए तैयार रहता था। राजा के हर फैसले पर उसे विश्वास था। राजा भी उनके हितों का पूरा ध्यान रखता। सैनिकों का रखता था ख्याल सैनिकों के परिवार के लोगों के लिए हर सुविधा मुहैया कराता। जरूरत पड़ने पर रात के अंधेरे में वेश बदल कर उनसे मिलने भी पहुंच जाता। राजा के दुश्मनों की हर रणनीति युद्ध के मैदान में विफल हो जाती। राजा के मंत्रीगण और सेनापति दुश्मनों की हर चाल का सटीक अंदा जा लगा कर पहले ही तैयारी कर लेते। कहानी में सबकुछ ठीक होता, तो कहानी लिखी जाती क्या, नहीं ना, तो अब पढ़ो असली बात। धीरे-धीरे अय्याश हो गया राजा दिन दोगुनी-रात चौगुनी तरक्की राजा के सिर चढ़कर बोलने लगी। राजा थोड़ा अय्याश होने लगा, लेकिन अपने सैनिकों का अब भी पूरा ख्याल रखता था। धीरे-धीरे राजा की अय्याशी के किस्से पूरे राज्य में मशहूर हो गए। एक दिन राज्य में दुश्मन राजा के कुछ सैनिक घूम रहे थे। मजदूरों के वेश म...

हिंदी अब हिंग्लिश हो गई है.. किसी के बाप का क्या जाता है ?

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जिस देश का हर नागरिक उसकी भाषा की हत्या करने पर तुला हो। जिस देश की भाषा को जबर्दस्ती आधुनिकता का हवाला देकर मिलावटी किया जा रहा हो। गुलामी के जमाने से चली आ रही मानसिकता जब भाषा पर इस हद तक हावी हो गई हो कि उसे पटक-पटककर बदलने पर मजबूर कर दिया गया हो। उस देश की भाषा को मरने से शायद ही कोई बचा सकता हो। बदले अस्तित्व में हिंदी का केवल हि है और इंग्लिश पूरी तरह हावी होकर नाम पर भी कब्जा जमा चुकी है। जी हां जब आप लोग कहते हैं कि हम हिंग्लिश जानते हैं, इतनी भारी भरकम हिंदी भला कौन इस्तेमाल करता है आजकल। तो शर्म आ जाती है। इसीलिए नहीं कि मुझे मिलाकर (कुछ विशेषज्ञों को छोड़कर) शायद 10 प्रतिशत लोगों को ही हिंदी का ज्ञान है। बल्कि वजह यह है कि आजकल की पौध आधुनिक होने का ताज पहनकर अपनी भाषा को मारने में जुटी है। कई अक्षर हिंदी के अखबारों से ही गायब हो चुके हैं। कुछ साल बाद शायद ही किसी को उनके बार में पता हो। जैसे यह की जगह ये और वह की जगह वो इत्यादि। जरा नजर घुमाकर देखिए कि आपके आस-पास के देशों ने अपनी भाषाओं को कितना सहेजकर रखा हुआ है। अमेरिका, लंदन, कोरिया, जापान, दुश्मन देश चीन,...

मोदी जी, ऐसे रुकेंगे गोरखपुर जैसे हादसे...

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गोरखपुर में कई बच्चे मर गए। खबर चारों तरफ है। बच्चों का पोस्टमॉर्टम हुआ या नहीं लेकिन खबर का जरूर होगा। सच हर किसी का अपना-अपना होता है। सो सरकार, अस्पताल, पीड़ित और मीडिया का भी होगा। जिस पर जिसको यकीन करना हो वो करे। लेकिन उससे आगे की बात ये है कि मोदीजी 2019 सिर पर है। ऐसा क्या करोगे कि बच्चों की मौत के पाप का प्रायश्चित भी हो जाए और जनता का आशीर्वाद भी मिले। अगली बार फिर से सीट पर बैठने का। क्योंकि सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, देश से स्वाइन फ्लू, डेंगू और चिकुनगुनिया भी खत्म नहीं हो रहा है। अब तो मौसम की भी परवाह नहीं कर रही ये बीमारियां। शायद सीलिए क्योंकि मौसम भी कहां अब किसी की परवाह कर रहा है। पर छोड़िए आप भी कहां सबकी परवाह करते हैं मोदीजी। अपनी मर्जी से जो देश के लिए सही लगता है वो कर देते हैं। रात 8 बजे आपके मन की बात ने सबके मन के परखच्चे उड़ा दिए थे। नोटबंदी सबको याद है। हम इसके फायदे नुकसान के बारे में बात नहीं करेंगे। मैं भी आपकी तरह निराशावादी नहीं हूं, हालांकि ये आदत मुझे मेरी मां से मिली है। इसीलिए मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूं। हमारे देश में वैसे भी सबको आदत ...