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भगवान पर भी गुस्सा आ ही जाता है

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निजामुद्दीन की रेड लाइट पर आज ऑफिस आते हुए फिर वो मिली, मेरे अलावा एक ऑटो और था वहां, वो ऑटो तक गई औऱ मैं अपने पर्स में एक छोटा नोट टटोलने लगा। वो हर रोज की तरह मेरे पास आकर खड़ी हो गई, शीशे के पास। पर रोज की तरह भइया-भइया कह कर चहचहाई नहीं। नोट हाथ में पकड़कर जैसे ही मैं उसकी तरफ मुड़ा, मेरा दिमाग खराब हो गया। आज उसका मुंह एक तरफ से सूजा हुआ था, ऐसा जैसे किसी ने बुरी तरह पीटा हो। उसके कोमल गाल पर नीचे की दाढ़ की तरफ कान से लेकर नाक तक एक बड़ा सा उभार था।  दाईं आंख भी सूजी हुई थी, हालांकि बाहर से कोई निशान दिख नहीं रहा था, लेकिन सूजन देखकर लग रहा था कि उसके साथ कुछ बुरा हुआ है। आज एक हाथ शॉल के अंदर दबाया हुआ था उसने, कुछ बोल भी नहीं रही थी। मैंने उसको पूछा, बेटे क्या हुआ है, किसने किया है, कोई परेशानी है क्या ? वो नहीं-नहीं कहती हुई पीछे की तरफ जाने लगी। मैंने उससे कहा कि बेटे भाई बोलती हो तुम मुझे, बताओ क्या परेशानी है, अगर किसी ने पीटा है तो चलते हैं उसके पास। वो बिना कुछ बोले वहां से चली गई औऱ बत्ती हरी हो गई, साथ ही पीछे से हॉर्न की आवाज आई औऱ मैं आगे की तरफ बढ़ गया। मेरी...