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बचाओ !

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पिछली बार हुए केदारनाथ हादसे के बाद जनता , मीडिया और सरकार का ध्यान पहाड़ों की परेशानियों की तरफ गया है। ऐसा नहीं है कि पहले से वहां विकास के काम नहीं हो रहे , लेकिन जो हो रहे हैं वो बेहद नाकाफी औऱ कम क्वालिटी के हैं। प्रकृति पर मानव की मार का बदला कहा जाए या फिर दैवीय आपदा , लेकिन केदारनाथ हादसे से सभी आज तक घायल हैं। वो जिनके परिवार वाले उस आपदा का शिकार हुए , वो जो उन्हे बचाने में शहीद हुए , वो जिन्हे वहां बार-बार दौरा करने जाना पड़ता है , वो जो मारे गए लोगों की गिनती को कम करके दिखाने की टेंशन में घुले चले जा रहे हैं , वो नेता जो लाशों पर सियासत कर रहे हैं और वो भी केदारनाथ दर्शन की इच्छा रखते हैं। डर सबके मन में हैं , कहीं फिर से किसी और पहाड़ी तीर्थस्थल पर ऐसा हो गया , तो क्या होगा ? लेकिन क्या कभी उन लोगों के बारे में सोचा जो पहाड़ों को बसाए हुए हैं। हां हां माना कि अब आपके मन में ये आएगा कि ये खुद पहाड़ी है तो पैरवी करने लगेगा , लेकिन सच ये है कि मेरे अलावा और कौन बताएगा। मैं केदारनाथ त्रासदी की बात नहीं करना चाहता , लेकिन आप ये बताइए , कि केदारनाथ औऱ उसके अलावा पहा...