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मई, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पत्रकार और मेट्रो वाला प्यार- 2

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मेट्रो में चढ़ते ही सामने खड़ी एक लड़की पर नजर पड़ी। लड़की ने लाल रंग की लिप्सिटक लगाई हुई थी। जो उसकी शक्ल की वाइब्रेंसी को और बढ़ा रही थी। वन पीस पहने हुए वो लड़की एक लड़के के साथ खड़ी थी। लड़के के बाल उसके माथे पर गिरे हुए थे, जिन्हें लड़की ने अपनी उंगलियों से पीछे की तरफ सेट किया। लड़का मेट्रो के फर्श को लगातार घूर रहा था। उसे मनाते हुए लड़की ने कुछ कहा, पर लड़के ने अचानक अपना हाथ मेट्रो की छत पर मारा। मेट्रो में सभी ने दोनों की ओर देखा, पर ठंसाठंस भरी हुई मेट्रो में दोनों ऐसे खड़े रहे जैसे अकेले किसी बीच पर ढलते हुए सूरज को देख रहे हों। अब लड़की थोड़ा सा लड़के की तरफ बढ़ी और उसके गले में अपने दोनों हाथ डालकर खड़ी हो गई। मैं आपके लिए इस पूरे एपिसोड को अपनी नजरों के कैमरे से दिमाग के हार्ड ड्राइव में कैद करता जा रहा था। दोनों के बीच में केवल लड़के का काले रंग का बैग था। लड़की ने बैग की जिप को अपना खिलौना बना कर खेलना शुरू कर दिया। फिर थोड़ी देर बाद बोर होकर उसने लड़के की शर्ट के सबसे ऊपर वाले बटन को दोबारा बंद किया। दोबारा इसलिए, क्योंकि वो पहले भी एक बार ऐसा कर चुकी थी। ...

मां भगवान होती है

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मां की छाती से लिपट कर दूध पी रहा ये अबोध बालक जब होश संभालेगा, तब शायद इसे अपनी मां की महानता का रत्तीभर अंदाजा लग पाए।  महान शब्द की शुरुआत म से शायद इसीलिए होती होगी क्योंकि म से हम सभी के जीवन का पहला शब्द मां बनता है। वो शब्द जिसकी बदौलत हम सभी का अस्तित्व है। सुबह के अखबार में पढ़ी ये खबर शायद आप सभी की निगाह तक न पहुंच पाई हो। पर मेरी आंखों में आंसू तड़के ही ले आई। वैसे तो बेहद इमोशनल हूं और शायद इसीलिए हर ऐक्शन और रिऐक्शन पर नजर रहती है। पर आज एक बार फिर अपनी मां को गौर से काम करते हुए देखता रहा इस खबर के बाद। बुंदेलखंड के दमोह में रेलवे ट्रैक के बगल में एक लाश मिली। रेलवे ट्रैक के बगल में लाश मिलने की खबर कोई नई नहीं। पर वाकया आत्मा को झकझोर देने वाला है। लाश जैसा कि आप फोटो में देख सकते हैं, एक महिला की है। पर ये महिला एक सुपरमॉम थी। हर मां एक सुपरमॉम होती है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये महिला शायद रेल से उतरते वक्त गिर गई। गिरते वक्त शायद कोई घातक गुमचोट लगी। जिसके चलते बाद में महिला की मौत हो गई। पर मां की महानता देखिए, कि अपने आखिरी लम्हों में भी उ...

सचिन तेंदुलकर, क्रिकेट, फिल्म और मैं...

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अपनी हर उपलब्धि को भगवान का प्रसाद बताने वाले क्रिकेट के भगवान से मुलाकात करने और कुछ बातचीत करने का मौका मिला। बचपन में सचिन की बैटिंग देखकर सोने वाला मेरा छोटा सा मन, हर रात सचिन की तरह हर बॉल पर छक्का जड़ने का सपना देखता था। पहली बार सचिन से मिला, तो लगा कि कद से छोटे सचिन, व्यक्तित्व से दुनिया की सबसे बड़ी शख्सियत  क्यों हैं। पूरे इंटर्व्यू के दौरान सचिन तेंदुलकर प्यारी सी मुस्कान के साथ हर सवाल का जवाब देते रहे। अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए दिल्ली के मौर्या होटल में पहुंचे सचिन के साथ फिल्म के प्रोड्यूसर भी थे। जिस बात पर सबसे पहले मेरी नजर गई, वो था ड्रेस कोड। सचिन औऱ फिल्म के प्रोड्यूसर दोनों ने सफेद शर्ट पर नीले रंग की अचकन पहनी हुई थी। बातचीत के दौरान सचिन ने एक जुमला कहा ,' एक बार खिलाड़ी, यानी जिंदगी भर खिलाड़ी' और वही उनकी फिटनेस से झलक भी रहा था। एक खिलाड़ी की नजर से सचिन गंगोत्री की तरह दिखाई देते हैं। जहां से निकली हर बूंद गंगा ही होती है।   एक बेहद सौम्य शख्सियत। चेहरे पर सम्मोहित करने वाली मुस्कान। माथे पर चमक और चेहरे पर शांति और सुकून का भाव। जि...

पत्रकार और Metro वाला प्यार

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मेट्रो में प्यार के इतने बीज अंकुरित हो रहे होते हैं, कि कभी-कभी समझ में नहीं आता कौन सा वाला पेड़ बनेगा ? आज किसी तरह से मेट्रो के अंदर एडजस्ट हुआ तो गेट पर आखिरी मैं ही था। इतने में पीछे से एक देहाती से लुक और भाषा वाले अंकल आए और कहा 'थोड़ा अंदर हो जइओ'। इतना कहते ही मेट्रो के दरवाजे बंद हो गए और उनका धड़ जो बाहर ही रह गया था उसने अपने हाथ खींच लिए। मेरे मुंह से निकल ही गया, 'और जवाब मेट्रो ने दे दिया'। एडजस्ट होते वक्त मैं अपना बैग आगे की तरफ लटका लेता हूं। किसी भी अनहोनी से खुद को बचाने के लिए। अरे भई हंसो मत, करना पड़ता है। मेेरे आगे वाली लड़की ने पलटकर देखा, और फिर बैग है, देखकर आगे को मुंह कर लिया। खैर, यमुना बैंक स्टेशन आया, और नम आंखों से एक खूबसूरत लड़की ने अपने मित्र को इस बेरहम भीड़ भरी मेट्रो के हवाले कर दिया। देखकर ही लग रहा था कि लड़की कुछ और 'गुड़ टाइम इन मेट्रो लाइन' बिताना चाहती थी। पर ऐसा हो ना सका। लड़का मेट्रो में सवार हो गया। मैं थोड़ा अंदर आ गया था, औऱ मेरी वाली जगह उस लड़के ने घेर ली। लड़के का फोन बजा, उसने देखा और काट दिया। शक्...

चार कंधों की लिस्ट

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किसी ने एक किस्सा सुनाया, जिसके बाद हर रोज एक ही बात सुनता हूं अपने आस-पास, 'यार चार कंधे जुटा लेना अपने लिए'। जी हां, अंदर तक झकझोर देने वाला किस्सा था, इसीलिए यहां साझा कर रहा हूं।  सोचने पर आपको भी मजबूर कर देगा, कि हम किस दुनिया में जी रहे हैं, आखिर ये जो हमारे आस-पास लोग हैं, क्या ये सच में हमारे अपने हैं, या जरूरत के यार। सोसाइटी को ही सबसे सेफ और सिक्योर माना जाता है, ज्यादातर मेट्रो सिटीज में, लगभग यही सोच सभी की है। मैं भी एक मोहल्ले में रहता हूं। जहां एक वक्त तक सभी एक दूसरे का हाल आसानी से पूछ सकते थे। क्योंकि मकान एक मंजिला ही थे, पर जैसे-जैसे मकानों की मंजिलें बढ़ती गईं, दिलों के फासले बढ़ती सीढ़ियों के साथ बढ़ते चले गए। शायद हम में से कुछ लोग इसे मानने से इनकार कर दें, तो उन लोगों को मैं बधाई दूंगा, कि यार सच में आप जिंदा हो। खैर, सोसायटी में रहने के अपने फायदे हैं, सिक्योरिटी और अगल-बगल के लोगों के अनचाहे हस्तक्षेप से छुटकारा। जी हां, अक्सर यही सुने हैं मैंने। पर जब ये कहानी सुनी, तो ये सारे फायदे एक बुलबुले की तरफ फूट गए। एक सोसायटी में एक व्यक्ति की मौ...

बाबा रामदेव की वजह से मेट्रो का कॉम्पिटीशन जीतते हैं सभी

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आजकल मेट्रो में सफर कर रहा हूं, मां कसम इतनी कहानियां होती हैं मेट्रो में, जितनी पंचतत्र में नहीं पढ़ी होंगी। दिल्ली में रहते हुए अगर मेट्रो में सफर नहीं किया तो फिर क्या किया। पर कुछ मेरी तरह भी हैं, जो मेट्रो की भीड़ में कुचले जाने से डरते हैं। फिलहाल तो मेट्रो के बढ़े हुए किराए खबर बने हुए हैं, लेकिन दिल्ली में जब पहली बार मेट्रोे शुरू हुई थी, तब मेट्रो में घूमने की बात ऐसे बताई जाती थी जैसे प्लेन में सफर करे आया हो कोई। तारीफ के इतने पुल बांधे जाते थे, जितने खुद मेट्रो ने नहीं बनाए होंगे। खैर अब मेट्रो रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। सुबह-सुबह जैसे ही आप मेट्रो स्टेशन पहुंचेंगे, आपका स्वागत करेगी एक लंबी लाइन। फिर आपको अच्छे से चेक करेगा सुरक्षाकर्मी, जिसके हाथ में पकड़े हुए यंत्र की हर पींपीं..... के साथ आपको अपने ऊपर ही शक होने लगता है। साला, कहीं जेब में कुछ है तो नहीं। शायद ही कोई ऐसा हो, जो उसकी पीं की आवाज के खत्म होने के बाद, जाओ सुनने का इंतजार न करता हो। खैर, थोड़ा आगे बढ़ेंगे तो एस्कलेटर पर ठुंसे हुए लोग ही आपको आपके सफर की मुश्किलों का अहसास करा देंगे। एस्क...