यानी.. हर तरफ मरें.. तो केवल महिलाएं
नर से बढ़कर नारी है..दो-दो मात्राओं का भार.. स्कूल में हिंदी के टीचर शास्त्री सर ने पढ़ाया था एक बार.. तब शायद मेरा कल्पनाशील मन.. इस बात का मर्म समझने लायक गहराई में गोता नहीं लगा पाया था.. लेकिन अब.. ज्यों-ज्यों उम्र बीत रही है.. समझता जा रहा हूं.. मम्मी को हर रोज त्याग करते देखकर बड़ा हुआ.. औऱ फिर दोनों बहनों को शादी के बाद देखता.. प्रैक्टिकली सीख रहा हूं.. महिलाएं हम पुरुषों से हर तरह से दोगुने से ज्यादा सामर्थ्वान हैं.. इस बात को हर बड़े विचारक.. राजनीतिज्ञ औऱ स्वयं भगवान भी मान चुके हैं... शिव ने जहां पार्वती की तुलना प्रकृति से करी.. तो वहीं महान चाणक्य ने भी महिलाओं के सामर्थ्य का गुणगान करते हुए कुछ पंक्तियां कहीं.. इसके अलावा मां बनने की गरिमा को बताते हुए एक विचारक ने कहा था कि मां बनना महिला के ऊपर निर्भर करता है.. जबकि पिता बनने का गौरव.. महिला की इच्छा पर निर्भर करता है.. यानी.. अगर महिलाओं को हटा लिया जाए.. तो मर्दानगी गई तेल लेने.. जी हां.. सही पढ़ा आपने.. ये हर रोज़ मसल दिखाने किसे जाएंगे.. और वो वंश बढ़ाने वाले आपके चिराग.. वंश आगे बढ़ाएंगे कैसे... लड़की को ...