कान के कच्चे राजा की अनसुनी कहानी
एक बहुत ही पराक्रमी राजा था। राजा हर युद्ध जीतता जा रहा था। राजा का साम्राज्य हर दिन बढ़ता ही जा रहा था। राजा के पराक्रम का यश हर दिशा में फैलता जा रहा था। उसकी सेना का हर सैनिक उसके लिए हर वक्त जान देने के लिए तैयार रहता था। राजा के हर फैसले पर उसे विश्वास था। राजा भी उनके हितों का पूरा ध्यान रखता। सैनिकों का रखता था ख्याल सैनिकों के परिवार के लोगों के लिए हर सुविधा मुहैया कराता। जरूरत पड़ने पर रात के अंधेरे में वेश बदल कर उनसे मिलने भी पहुंच जाता। राजा के दुश्मनों की हर रणनीति युद्ध के मैदान में विफल हो जाती। राजा के मंत्रीगण और सेनापति दुश्मनों की हर चाल का सटीक अंदा जा लगा कर पहले ही तैयारी कर लेते। कहानी में सबकुछ ठीक होता, तो कहानी लिखी जाती क्या, नहीं ना, तो अब पढ़ो असली बात। धीरे-धीरे अय्याश हो गया राजा दिन दोगुनी-रात चौगुनी तरक्की राजा के सिर चढ़कर बोलने लगी। राजा थोड़ा अय्याश होने लगा, लेकिन अपने सैनिकों का अब भी पूरा ख्याल रखता था। धीरे-धीरे राजा की अय्याशी के किस्से पूरे राज्य में मशहूर हो गए। एक दिन राज्य में दुश्मन राजा के कुछ सैनिक घूम रहे थे। मजदूरों के वेश म...