संदेश

अक्टूबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेसेज भेजना बंद कर दो

चित्र
गए दिनों की बातें हो गई हैं, जब मिल बैठते थे तीन यार। दारू की बात नहीं, दिल की बात करने को, दारूबाज तो आज भी मिल लेते हैं। लेकिन आजकल तो हर रिश्ते और हर त्योहार का बंटाधार इस इंटरनेट पर मौजूद फ्री मेसेज सेवा ने कर डाला है। जन्मदिन हो, त्योहार हो या फिर कोई बुरी खबर हो। संवेदनाएं, बधाई या फिर शुभकामनाएं सिर्फ एक मेसेज बन कर रह गई हैं। किसी दोस्त की टांग टूट गई हो तो उसके घर जाने की बजाए उसकी फेसबुक पर टूटी टांग वाली फोटो पर ऑऑऑ लिखकर सारा हालचाल उसी पर पूछ लिया जाता है। टूटी टांग वाला भी अब ऑनलाइन साइट और मेसेज सर्विस से मिलने वाली संवेदनाओं को ही रिअल मानकर काम चला लेता है।  कई झगड़े तो केवल इसी बात पर हो जाते हैं कि मैंने तुम्हे मेसेज भेजा पर नीले टिक होने के बाद भी तुमने उसका जवाब 2 घंटे बाद क्यों दिया ? आखिर ऐसा क्या जरूरी काम था जो पढ़ने के बाद 20 सेकेंड का जवाब टाइप करने का भी समय नहीं मिला। वैसे ये मेसेज सर्विस इमोशंस को सप्लाई करने के लिए इमॉटिकॉन्स नाम की चीजों से भरी पड़ी है। ऑनलाइन साइट्स पर तो इनसे भी आगे शोले के गब्बर और बसंती से लेकर विदेशी मॉडलों की शक्...

बर्फ़ हुई संवेदना, ख़त्म हुई सब बात....

चित्र
वर्चुअल वर्ल्ड में फ्रेंड लिस्ट की हदें पार कर दूसरा फेसबुक अकाउंट बनाने या फिर पेज बनाने को मजबूर हो चुके कई सोशल बटरफ्लाइज़, आखिर डिप्रेशन में आकर खुदकुशी क्यों करने लगे हैं ? कहीं इसकी वजह  हम ही तो नहीं ?  ज्यों-ज्यों हम बुद्धिजीवी विकसित होते जा रहे हैं, ऐसा लगता है रोबॉटिक भी होते जा रहे हैं। दोस्त के साथ लगाए जाने वाले ठहाके अब :) ऐसे इमोटिकॉन बन चुके हैं, बुरी खबर पर फोन करके या मिलने जाने की जगह फेसबुक पर RIP लिखकर नेगेटिविटी से पल्ला झाड़ने या फिर संवेदना प्रकट करने का चलन है। मानों सबके अंदर से इमोशन नाम की चीज खत्म होती जा रही है। क्या ये हमारे इवॉल्यूशन का अगला लेवल है ? ज़रा अपने आस-पास गौर से देखिए, कितने लोग हैं जो आपके लिए कभी भी कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। बशर्ते आप बॉस नहीं हों, क्योंकि अगर ऐसा होगा तो आपके पास मक्खन लगाने वालों की फौज होगी। जब आप सच में इस सवाल का जवाब एकदम निष्पक्षता से ढूंढेंगे, तो पाएंगे कि आपके एक-दो दोस्तों को छोड़कर बाकी कोई नहीं। हालांकि आपका जवाब, घर पर आपका परिवार भी हो सकता है। किंतु थोड़ा और आगे चलकर ...

आपका मोबाइल फोन जहरीला है ?

इस युग में जब हममें से कई लोग बिना फोन के जिंदगी सोच भी नहीं सकते। जब मोबाइल केवल फोन न रहकर कैमरा, चलता-फिरता कंप्यूटर, सूचना और मनोरंजन का साधन और शिशुओं की मांओं के लिए रोते हुए या परेशान कर रहे बच्चे को चुप कराने या ध्यान बंटाने की रामबाण दवा भी बन गया है। ऐसे में विदेशों में हुआ ये शोध कान खड़े कर देने वाला है। फोन खरीदने से पहले बैटरी लाइफ, बैटरी पावर, बैटरी कितनी देर तक फुल चार्ज करने के बाद चलती है, ये सभी सवाल हम जरूर पूछते हैं। पर इसे पढ़ने के बाद कौन से बैटरी है, इस पर भी आप ध्यान जरूर देने लगेंगे। ये सुनकर चौंकना लाजमी है, लेकिन ये पढ़कर आपको अपने फोन से दूर रहने की कई वजहों में से एक और वजह आज मिल जाएगी। एक रिसर्च के मुताबिक हो सकता है कि आपके मोबाइल फोन में लगी बैटरी जानलेवा गैस छोड़ती हो। अमेरिका और चीन में हुई एक रिसर्च से पता चला है कि मोबाइल फोन में लगने वाली एक खास तरह की बैटरी से 100 ज्यादा जहरीली गैसों का रिसाव होता है। अमेरिका के इंस्टीट्यूट ऑफ़ एनबीसी डिफ़ेंस और चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी में  ‘ लीथियम आयन ’ बैटरी   पर शोध किया गया। शोध में पाय...