संदेश

मार्च, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सबसे ज्यादा एडजस्ट तो भगवान ही करता है

चित्र
आज फुटपाथ पर भगवानों को आसरा दिए इस गरीब को देखा..  तो उसके मुंह पर सुकून के साथ.... इतने सारे बेघर-अपंग पड़े भगवानों के साथ खुद पर दया आ गई.. मन चंगा तो कटौती में गंगा.. अब गंगा भी मैली हो गई है.. औऱ साथ में मन भी.. तो फिर आस्था कैसे बचे.. वो भी हो गई.. कलियुग केवल नाम अधारा.. अब इसको कहने वाले ने तो कह दिया.. पर जैसे सबका अपना-अपना सच होता है. वैसे ही समझ भी.. औऱ समझ लगभग सभी की मतलबी होती है.. इसलिए आस्था को मन से जोड़ा गया.. लेकिन ज्यादातर लोग भगवान के साथ भी तीन-पांच करने से बाज नहीं आते.. सब्जी वाले भइय़ा.. 10 की क्यों 8 की दे दो ना.. ऐसे ही महाशिवरात्रि है.. मेरा व्रत है.. बस इतने में तो हो जाना चाहिए भगवान को प्रसन्न.. औऱ क्या.. अब जान भी ले लेंगे.. मतलब ऑफिस के साथ-साथ क्या-क्या कर लें.. जो फीजेबल नहीं है.. उसे कैसे कर लें.. जी हां.. आज ही सुना मैंने.. ऐसा नहीं है कि मैंने नहीं किया ऐसा कभी.. लेकिन सुनते ही मन ने कहा कि सच ही तो है.. महाशिवरात्रि को शिवालयों में भीड़.. शिव पर चढ़ते जल.. बेल पत्र और उन्हें प्रसन्न करने की सभी सामग्री के साथ.. उनका वंदन करते हुए क...