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नवंबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लव इन ATM लाइन

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ब्लैकमनी पर मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक से कई नेता और कई कालाधनकुबेर परेशान हैं। डर के मारे, हर एक रेसिस्ट हो गया है और रंगीन नोटों को कालेधन से सफेद करने के जुगाड़ में जुट गया है। हालांकि इस दौरान गली के कुछ लौंडों और गरीब-मजदूरों के दिन भी फिर गए हैं। मजदूरों की इस दौरान चांदी हो गई है, उन्हे भी अब समझ में आ गया है कि आधार कार्ड बनवाने को सरकार क्यों कह रही थी। कल तक जो लात मारते थे वो आज बुला बुलाकर कमीशन दे रहे हैं, नोट बदलवाने के लिए। ये तो थी मेन स्टोरी, लेकिन इससे ज्यादा अहम है कई साइड स्टोरीज। जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण होती है किसी भी वक्त पर चल रही लव स्टोरी। क्योंकि वो उस दौर के असली इमोशन रायते की तरह फैला देती है। पेश है सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान पनपे कई गुलशनों का एक पिंक दो हजार के नोट वाला सच। पहले मोहल्ले के लड़के बिजली जाने का इंतजार करते थे, फिर दौर आया ब्लैंक कॉल का, उससे आगे बढ़े तो मिस कॉल तक मामला पहुंचा और अब फेसबुक से ढूंढ कर व्हट्स ऐप पर चोंच भिड़ाने का चलन है। कालेधन के खिलाफ इस मुहिम ने गली के सभी लौंडों को घर से बाहर आवारागर्दी का एक सुहा...

जहर हवा में नहीं, सोच में है

पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर और इन सिलेंडरों से निकलकर मुंह पर एक खास तरह के हेल्मेट से बांधे हुए मास्क के साथ बाइक-स्कूटर चलाते लोग। कार, बस और मेट्रो में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यव्सथा। गरीबों के लिए सब्सिडी में 50 प्रतिशत सस्ते ऑक्सीजन सिलेंडर। एक सरकारी स्कीम के तहत बीपीएल कार्ड धारकों के लिए प्रधानमंत्री सांस योजना के तहत 0 प्रतिशत इंटरेस्ट रेट के साथ कुछ सिलेक्ट जगहों पर बेची जा रही ‘ शुद्ध सांस ’ की पूरी किट के साथ सिलेंडर। पीएम की चाहत, कि गरीबों को भी अमीरों जैसी ऑक्सीजन से भरपूर सांस लेने की आजादी हो। वहीं कुछ नामी-गिरामी कॉलेजों में पीएम की इस योजना के खिलाफ आंदोलन। दीवली बाद से हुए प्रदूषण और अंधेरे से निबटने के लिए आनन-फानन में केंद्र सरकार ने मीटिंग कर देशभर में अंधेरा छंटने तक बिजली माफ करने का एलान किया। दिल्ली के सीएम ने इस अंधेरे के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को दोषी ठहराया। बाबा ने लॉन्च किया फेफड़ो को ताकतवर बनाने का नया हर्बल प्रॉडक्ट। अमेरिकी डॉक्टरों को मिली बड़ी कामयाबी, रिवर्स लाइफ टेस्ट में सफल साइंटिस्टों ने लैब में पैदा किया एक ऐसा टेस्ट ट्यूब बेबी जिसे जीने ...

बच्चे भगवान का रूप होते हैं.. लेकिन अपने

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सड़क पर नंग-धड़ंग बचपन की धुन में मलंग, मिट्टी और मैल से लिपटे तन से झांकती पसलियों के साथ, एक हाथ में सफेद कपड़ा लिए, दूसरे हाथ को फैला कर भीख मांगते बच्चों को देखकर दिमाग में कई विचार एक साथ मल्लयुद्ध करने लग जाते हैं। अगले दस सेकेंड बाद किसको कार में रखा बिस्किट दिया जाए या ना दिया जाए का फैसला जीता हुआ विचार होता है। लेकिन लाल बत्ती खत्म होने के बाद, हर बीतते दिन के साथ अर्जित की हुई ज्ञान की परत को हारे हुए सभी विचार मैल साबित करने पर तुल जाते हैं। ये तस्वीरें और वाकया आज शाम का है। जैसे ही रामा कृष्णा आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन से मैं लौटने को हुआ, वहां खड़े स्ट्रीट फूड खाते मेरे कुछ दोस्तों ने मुझे अपने साथ खाने का निमंत्रण दिया। खड़े होते ही मेरे पैर से ये चेक शर्ट वाला बच्चा आकर लिपट गया और दस रुपए देने की जिद करने लगा। जिसे फिर मेरे दिमाग में जीते हुए एक विचार ने डांट कर भगा दिया। बच्चे को भगाने के तुरंत बाद बाकी बचे विचारों ने अपनी आदत के मुताबिक मुझे कोसना शुरू कर दिया। आज का ये ब्लॉग उन्ही विचारों की गालियों का नतीजा है। अब अपनी वैचारिक और माली गरीबी पर शर्...