जहर हवा में नहीं, सोच में है
पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर और इन सिलेंडरों से निकलकर मुंह पर
एक खास तरह के हेल्मेट से बांधे हुए मास्क के साथ बाइक-स्कूटर चलाते लोग। कार, बस
और मेट्रो में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यव्सथा। गरीबों के लिए सब्सिडी में 50 प्रतिशत
सस्ते ऑक्सीजन सिलेंडर। एक सरकारी स्कीम के तहत बीपीएल कार्ड धारकों के लिए
प्रधानमंत्री सांस योजना के तहत 0 प्रतिशत इंटरेस्ट रेट के साथ कुछ सिलेक्ट जगहों
पर बेची जा रही ‘शुद्ध सांस’ की पूरी किट के साथ सिलेंडर। पीएम की चाहत, कि गरीबों को भी अमीरों जैसी
ऑक्सीजन से भरपूर सांस लेने की आजादी हो। वहीं कुछ नामी-गिरामी कॉलेजों में पीएम
की इस योजना के खिलाफ आंदोलन। दीवली बाद से हुए प्रदूषण और अंधेरे से निबटने के
लिए आनन-फानन में केंद्र सरकार ने मीटिंग कर देशभर में अंधेरा छंटने तक बिजली माफ
करने का एलान किया। दिल्ली के सीएम ने इस अंधेरे के लिए केंद्र सरकार की नीतियों
को दोषी ठहराया। बाबा ने लॉन्च किया फेफड़ो को ताकतवर बनाने का नया हर्बल
प्रॉडक्ट। अमेरिकी डॉक्टरों को मिली बड़ी कामयाबी, रिवर्स लाइफ टेस्ट में सफल
साइंटिस्टों ने लैब में पैदा किया एक ऐसा टेस्ट ट्यूब बेबी जिसे जीने के लिए
ऑक्सीजन नहीं बल्की कार्बन डाइ ऑक्साइड की जरूरत होगी।
ये हॉलिवुड की फिल्मों से
चुराये साई-फाई सीन को आज के राजनीतिक हालातों के साथ मिलाकर पेश किया गया एक
जहरीला व्यंग्य जरूर लगे, लेकिन मनोरंजन के लिए बिल्कुल नहीं है। ये एक डरावनी
सच्चाई है, जो हमारे सामने मुंह फाड़े खड़ी है। इस डरावने सपने को सच करने में हम
सभी शिद्दत से जुटे हैं। अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता की थ्योरी पर चलने वाले
हम सभी इसके जिम्मेदार हैं।
अब तो लगता है कि दिल्ली आने और यहां बसने की सोचने वालों
को आज से सिगरेट पीने की सलाह देनी शुरू कर देनी चाहिए। बीड़ी भी पी सकते हैं, लेकिन इसे दवा की
तरह हर हफ्ते बढ़ाएं और जब आप कम से कम 40-50 सिगरेट रोज तक पहुंच जाएं तो दिल्ली
आइए और कमाने की दौड़ में जुट जाइए।
कल से ही सांस लेने में मुझे दिक्कत महसूस हो रही है, गले
में हल्की जलन और फेफड़ो में कुछ जमा हुआ सा लगने लगा है। मुंह में कड़वाहट सी है,
ऐसा लग रहा है जैसे कुछ दिनों से दवा ले रहा हूं। पानी पीकर इस स्वाद और गले में
हो रही खराश को अंदर निगलने की कोशिश में जुटा हूं। बीते दो दिनों से घर में खुद
को नजरबंद करा है। शुक्र है कि शनिवार-इतवार छुट्टी है, इसीलिए सारे दरवाजे खिड़की
बंद कर हम सभी परिवारवाले घर के अंदर बंद बैठे हैं। मुझे पूरा यकीन है
दिल्ली-एनसीआर में रहनेवाले सभी लोग इसी हाल में होंगे।
आपात बैठकों और कई तरह के एक्सपेरिमेंट भी अब किए जाएंगे।
लेकिन क्या ये परेशानी केवल आज की है ? बस इसी साल की, क्योंकि
सच में जरा याद कीजिए आप सभी ने अब तक के अपने जीवन में कितने पेड़ लगाए हैं ? किस-किसकी कार-बाइक या
बाकी वाहनों का पॉल्यूशन चेक अप टु डेट है ? दीवाली में पटाखे सिर्फ
शगुन के लिए जलाए या फिर ऐश के लिए ? कूड़े के ढेर को गली में जलाने से आप सफाईकर्मी
को रोकते हैं क्या ?
और हां ऐसा नहीं है कि मेरी नजर में सरकार जिम्मेदार नहीं
है। किसानों को कोसने से पहले जरा ये सोच लीजिए कि हमारे देश में खेती के लिए
टेकनॉलजी कितने किसानों की पहुंच में है ? सरकार आपकी कार पर ऑड-ईवन लगवाएगी, कंस्ट्रक्शन रुकवाएगी लेकिन पूरे देश में
लगी इन फैक्ट्रियों से होने वाले हर तरह के पॉल्यूशन पर लगाम कसने के लिए कुछ नहीं
करेगी ?
शॉर्ट टर्म नहीं.. दूरगामी परिणाम वाले ऐक्शन चाहिए... पहले
हवा बर्बाद करो.. फिर मास्क बेचो या सिलेंडर... पहले पानी बर्बाद करो.. फिर वॉटर
प्यूरिफायर बेचो.. बर्बाद करते वक्त भी ये कुछ बनाकर हमे बेच ही रहे थे.. और अब
उसके बाद भी... वातावरण एक बेहतरीन शब्द तो है ही.. जैसा कि फिल्म में वो सुन्दर
अभिनेत्री बताती है.. पर उससे पहले ये जीवन की जरूरत है। वर्ना आज हवा, कल पानी और
फिर खाने में प्रदूषण के काल के पहिए में फंसकर हम सबका विनाश निश्चित है।
Aisa dhua har saal diwali ke aas paas hota hai .. bas marketing nahi hoti .sab marketing ka khel hai . Public nahi byers hai ham or pollution marketing sesion ka naya stunt hai.. warna pollution roz hi hota hai
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