अभी थोडी देर में फोन करती हूं...लेकिन दूसरी तरफ सन्नाटा था
मैं अभी थोडी देर में फोन करती हूं... यह कहकर उसने तुरंत फोन डिसकनेक्ट कर
दिया.. थोड़ी देर बाद... रवि ने फोन देखा... साला कोई मिस कॉल नहीं..यहां एक बात समझ नहीं आती.. अगर आपसे कोई थोड़ी देर बाद फोन करने को कह दे...औऱ आपके पास कोई काम न हो... तो हर 5 मिनट बाद आप फोन उठाकर देखते क्यों हैं... जबकि आप खुद साक्षात फोन के सामने पिछले 5 मिनट से आंखें गडाए बैठे हैं.. कि बजे और आपकी बात हो...
खैर मोहतरमा का फोन नहीं आया.. और थोड़ी देर को ठीक 10 मिनट बीत जाने के बाद रवि ने फिर फोन घुमा दिया.. 5-6 घंटी बाद रिसीव करते हुए बोली..5 बजे ऑफिस से निकलते ही फोन करती हूं...5 बजने में अभी 1 घंटा था.. भाई ने हार नहीं मानी... करने लगा इंतज़ार... औऱ जैसे ही पांच बजे..
फिर फोन उलट-पलट कर देखा.. जैसे कोई मिस कॉल रास्ते में अटकी हो... ऐसे करने
से टपक पड़े... लेकिन नाकामी... थोड़ा औऱ इंतज़ार किया..
अब घंटी बजे जा रही थी.. लेकिन कोई रिसीव ही नहीं कर रहा था... दूसरे फोन पर मिलाने पर भी वही हाल... टर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र... औऱ फिर वही किलसाने वाली ऑटोमैटिक आवाज़... जिस नम्बर पर आप कॉल कर रहे हैं वो अभी आपका फोन नहीं उठा रहे हैं.. कृपया थोड़ी देर बाद फोन करें... कट
अब तो फोन कभी इस नंबर पर ...तो कभी उस नंबर पर... रवि के पसीने छूटने लगे...उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था.. कि वो आखिर क्या करे..कहां जाए?
अभी कुछ दिनों पहले ही तो उसने बताया था..कि उसकी एक ऑफिस की साथी का किसी ने गाडी के अंदर से हाथ खींचा था... पर वो संभल कर वहां से जल्दी निकल गई... औऱ उसके दिमाग में न जाने कितने सवाल आ गए... और सबके जवाब नेगेटिव मिल रहे थे.. पर दिल किसी भी जवाब को मानने को तैयार नहीं था... घर पर एसी में होने के बावजूद माथे से पसीना टपक रहा था...
वहीं दूसरी तरफ... हाथ लगातार नंबर ट्राय भी करता जा रहा था...कि हज़ारों घंटियों के बीच.... अचानक फोन रिसीव हो गया...रवि तुरंत खुद को संभालते हुए बोला...
हैलो... हैलो... लेकिन दूसरी तरफ सन्नाटा था....
रवि फिर बोला.... हैलो.. कुछ तो बोल डॉली... हैलो...
पर दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी... रवि ने चुपचाप फोन कान पर लगाए
रखा... कि कहीं से कोई सुराग मिल जाए...
अब आखिर ऐसे में वो जाए भी तो कहां जाए...कैसे ढूंढे ?
फोन पर लीड लगाकर... रवि ने गाडी की चाबी अठाई... और टाइम देखा... टाइम के हिसाब से डॉली मेट्रो स्टेशन पर होती... बस कार स्टार्ट की..औऱ चल दिया नोएडा सिटी सेंटर के मेट्रो स्टेशन की तरफ....
तकरीबन 7 मिनट बीच चुके थे... दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आ रही थी...
अब रवि पूरी तरह से डर चुका था... परेशान था.. आए दिन घिनौनी वारदातों को सुनते-सुनते हम सभी का दिमाग उस अनहोनी को ही सोचने लगता है...रवि ने फोन डिसकनेक्ट किया.. औऱ सोचा कि एक बार दोबारा मिला कर देखता हूं... क्या पता इस बार कुछ कह दे... फिर आसान हो जाएगा..
मेट्रो स्टेशन पर खडे हुए रवि ने दोबारा फोन मिलाया.. तो फोन रिसीव हो गया..इस बार रवि ने हैलो नहीं बोला...चुपचाप सुनने का मन था उसका... ताकि.. जगह औऱ स्थिति.. भांप सके.. औऱ साथ ही साथ डॉली की हल्की सी आवाज़ को भी आसानी से सुन सके..
दूसरी तरफ से आवाज़ आई... हैलो.. औए तू यहां आ गया... मैने मना किया था न.. कि आज नहीं जाएंगे घूमने...
आवाज़ डॉली की थी.. औऱ रवि ने नजर घुमाई.. तो देखा गुस्से में बडबडाती डॉली सामने खडी थी...
रवि उसके पास जाकर कुछ बोलता..
इससे पहले उसने अपने गुस्से की पूरी मशीनगन खाली कर दी.... रवि के मन में तसल्ली का भाव था... उसे.. अपने घर के कपडों पर..अपने न धुले चेहरे पर.. बिखरे हुए बालों पर... बाथरूम स्लिपरज़ पर.. किसी भी चीज़ पर गुस्सा नहीं आ रहा था... बस सुकून से सुनता जा रहा था..
अब ये डॉली को कौन बताए कि रवि क्यों मजे से उसकी डांट सुनता जा रहा था....
क्यों सही है ना?
दिया.. थोड़ी देर बाद... रवि ने फोन देखा... साला कोई मिस कॉल नहीं..यहां एक बात समझ नहीं आती.. अगर आपसे कोई थोड़ी देर बाद फोन करने को कह दे...औऱ आपके पास कोई काम न हो... तो हर 5 मिनट बाद आप फोन उठाकर देखते क्यों हैं... जबकि आप खुद साक्षात फोन के सामने पिछले 5 मिनट से आंखें गडाए बैठे हैं.. कि बजे और आपकी बात हो...
खैर मोहतरमा का फोन नहीं आया.. और थोड़ी देर को ठीक 10 मिनट बीत जाने के बाद रवि ने फिर फोन घुमा दिया.. 5-6 घंटी बाद रिसीव करते हुए बोली..5 बजे ऑफिस से निकलते ही फोन करती हूं...5 बजने में अभी 1 घंटा था.. भाई ने हार नहीं मानी... करने लगा इंतज़ार... औऱ जैसे ही पांच बजे..
फिर फोन उलट-पलट कर देखा.. जैसे कोई मिस कॉल रास्ते में अटकी हो... ऐसे करने
से टपक पड़े... लेकिन नाकामी... थोड़ा औऱ इंतज़ार किया..
अब घंटी बजे जा रही थी.. लेकिन कोई रिसीव ही नहीं कर रहा था... दूसरे फोन पर मिलाने पर भी वही हाल... टर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र... औऱ फिर वही किलसाने वाली ऑटोमैटिक आवाज़... जिस नम्बर पर आप कॉल कर रहे हैं वो अभी आपका फोन नहीं उठा रहे हैं.. कृपया थोड़ी देर बाद फोन करें... कट
अब तो फोन कभी इस नंबर पर ...तो कभी उस नंबर पर... रवि के पसीने छूटने लगे...उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था.. कि वो आखिर क्या करे..कहां जाए?
अभी कुछ दिनों पहले ही तो उसने बताया था..कि उसकी एक ऑफिस की साथी का किसी ने गाडी के अंदर से हाथ खींचा था... पर वो संभल कर वहां से जल्दी निकल गई... औऱ उसके दिमाग में न जाने कितने सवाल आ गए... और सबके जवाब नेगेटिव मिल रहे थे.. पर दिल किसी भी जवाब को मानने को तैयार नहीं था... घर पर एसी में होने के बावजूद माथे से पसीना टपक रहा था...
वहीं दूसरी तरफ... हाथ लगातार नंबर ट्राय भी करता जा रहा था...कि हज़ारों घंटियों के बीच.... अचानक फोन रिसीव हो गया...रवि तुरंत खुद को संभालते हुए बोला...
हैलो... हैलो... लेकिन दूसरी तरफ सन्नाटा था....
रवि फिर बोला.... हैलो.. कुछ तो बोल डॉली... हैलो...
पर दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी... रवि ने चुपचाप फोन कान पर लगाए
रखा... कि कहीं से कोई सुराग मिल जाए...
अब आखिर ऐसे में वो जाए भी तो कहां जाए...कैसे ढूंढे ?
फोन पर लीड लगाकर... रवि ने गाडी की चाबी अठाई... और टाइम देखा... टाइम के हिसाब से डॉली मेट्रो स्टेशन पर होती... बस कार स्टार्ट की..औऱ चल दिया नोएडा सिटी सेंटर के मेट्रो स्टेशन की तरफ....
तकरीबन 7 मिनट बीच चुके थे... दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आ रही थी...
अब रवि पूरी तरह से डर चुका था... परेशान था.. आए दिन घिनौनी वारदातों को सुनते-सुनते हम सभी का दिमाग उस अनहोनी को ही सोचने लगता है...रवि ने फोन डिसकनेक्ट किया.. औऱ सोचा कि एक बार दोबारा मिला कर देखता हूं... क्या पता इस बार कुछ कह दे... फिर आसान हो जाएगा..
मेट्रो स्टेशन पर खडे हुए रवि ने दोबारा फोन मिलाया.. तो फोन रिसीव हो गया..इस बार रवि ने हैलो नहीं बोला...चुपचाप सुनने का मन था उसका... ताकि.. जगह औऱ स्थिति.. भांप सके.. औऱ साथ ही साथ डॉली की हल्की सी आवाज़ को भी आसानी से सुन सके..
दूसरी तरफ से आवाज़ आई... हैलो.. औए तू यहां आ गया... मैने मना किया था न.. कि आज नहीं जाएंगे घूमने...
आवाज़ डॉली की थी.. औऱ रवि ने नजर घुमाई.. तो देखा गुस्से में बडबडाती डॉली सामने खडी थी...
रवि उसके पास जाकर कुछ बोलता..
इससे पहले उसने अपने गुस्से की पूरी मशीनगन खाली कर दी.... रवि के मन में तसल्ली का भाव था... उसे.. अपने घर के कपडों पर..अपने न धुले चेहरे पर.. बिखरे हुए बालों पर... बाथरूम स्लिपरज़ पर.. किसी भी चीज़ पर गुस्सा नहीं आ रहा था... बस सुकून से सुनता जा रहा था..
अब ये डॉली को कौन बताए कि रवि क्यों मजे से उसकी डांट सुनता जा रहा था....
क्यों सही है ना?
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