मोदी जी, ऐसे रुकेंगे गोरखपुर जैसे हादसे...


गोरखपुर में कई बच्चे मर गए। खबर चारों तरफ है। बच्चों का पोस्टमॉर्टम हुआ या नहीं लेकिन खबर का जरूर होगा। सच हर किसी का अपना-अपना होता है। सो सरकार, अस्पताल, पीड़ित और मीडिया का भी होगा। जिस पर जिसको यकीन करना हो वो करे। लेकिन उससे आगे की बात ये है कि मोदीजी 2019 सिर पर है। ऐसा क्या करोगे कि बच्चों की मौत के पाप का प्रायश्चित भी हो जाए और जनता का आशीर्वाद भी मिले। अगली बार फिर से सीट पर बैठने का।

क्योंकि सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, देश से स्वाइन फ्लू, डेंगू और चिकुनगुनिया भी खत्म नहीं हो रहा है। अब तो मौसम की भी परवाह नहीं कर रही ये बीमारियां। शायद सीलिए क्योंकि मौसम भी कहां अब किसी की परवाह कर रहा है। पर छोड़िए आप भी कहां सबकी परवाह करते हैं मोदीजी। अपनी मर्जी से जो देश के लिए सही लगता है वो कर देते हैं। रात 8 बजे आपके मन की बात ने सबके मन के परखच्चे उड़ा दिए थे। नोटबंदी सबको याद है। हम इसके फायदे नुकसान के बारे में बात नहीं करेंगे।

मैं भी आपकी तरह निराशावादी नहीं हूं, हालांकि ये आदत मुझे मेरी मां से मिली है। इसीलिए मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूं। हमारे देश में वैसे भी सबको आदत होती है, ये फ्री का काम करने की। मेरा सुझाव कोई नया नहीं है। पर हां अगर आप करने में कामयाब हो गए, तब देश की कायापलट जरूर हो जाएगी। आपकी भी, शायद।

आप बस ऐसा कर दीजिए, कि देश का हर सरकारी पद पर बैठा आदमी। चाहे वो नेता हो, अध्यापक हो, डॉक्टर हो, बाबू हो, आईएस हो, सबसे छोटा कर्मचारी हो, आप हों या फिर राष्ट्रपति जी ही क्यों न हों, सबका इलाज उसी इलाके के सरकारी अस्पताल में ही हो। जरूरत पड़ने पर प्राइवेट इलाज कराने का कोई प्रावधान मत छोड़िएगा। मैं आपको बता दूं ये लोग इसमें भी लोचा कर देंगे। इसीलिए जैसा आपको पसंद है, डिजिटल इंडिया वाला आइडिया, ठीक वैसा ही लागू करा दीजिए। 

कोई भी सरकारी कर्मचारी बीमार हो या फिर उसके घर में कोई बीमार हो, उसको एक सेंट्रल वेबसाइट पर ब्योरा रियल टाइम डालना जरूरी हो। हर सरकारी अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगवा दीजिए। खर्चा तो होगा, पर टैक्स तो आ ही रहा है। आप तो बस प्रोटोकॉल बना दीजिए, पालन तो आप करा ही लेते हैं। इतना तो आप पर विश्वास है। बस, फिर देखते हैं कि कैसै साफ नहीं रहते अस्पताल, कैसे काम पूरा नहीं होता, कैसे नहीं बैठते डॉक्टर, दवा कैसे नहीं मिलती और कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर कम पड़ते हैं।

जब आपके कहने पर हम सब लाइन लगा सकते हैं अपने ही पैसों के लिए। तो प्लीज इनसे भी लाइन लगवा दीजिए। जब
अनपढ़ जनता के हाथ में मोबाइल देकर आप डिजिटल इंडिया का सपना देख सकते हैं। तो फिर देश हित के लिए ये क्यों नहीं ? और हां ऐसा ही कुछ कर दीजिए शिक्षा के क्षेत्र में भी। 

ये मेरे मन की बात है और शायद देश के मन की भी, इसे अपने मन की बात बना लीजिए।
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