पत्रकार और मेट्रो वाला प्यार- 3
उसके आंसू रुक नहीं रहे थे.
रह-रहकर अपना मोबाइल चेक कर रही थी. भीड़ भरी मेट्रो में इस कदर रोते हुए, उसे सब
देख रहे थे. लेकिन, उसे शायद इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था. या फिर, शायद
वो शर्म इतनी कर चुकी थी अपनी जिंदगी में, कि अब आंसू बेशर्म हो चुके थे.
सौ फीसदी
इंडियन ब्यूटी, बिंदी और सिंदूर लगाए वो रोते हुए भी बेहद खूबसूरत लग रही
थी. ऐसा सिर्फ मुझे ही नहीं लग रहा होगा. इस बात को मैं इत्मीनान से इसीलिए कह
सकता हूं. कि जितनी बार उसने यमुना बैंक से आर के आश्रम तक अपने आंसू पोंछने के
लिए दुपट्टा उठाया होगा. उतनी ही बार उसे रोते हुए देखता हुआ मैं अपनी बगलें
झांकने लगता. इसी दौरान अगल-बगल के सभी लोगों पर जब नजर गई. तो देखा कि हर कोई उसे
ही देख रहा है.
इस बार उसने रोते हुए अपना
पर्स खोला और आंसू पोंछने के लिए अपना रुमाल निकाला. रुमाल कांपते हुए हाथों से
फिसल गया और मेरे पैर पर गिरा. मैंने तुरंत रुमाल उठाकर झाड़ते हुए उसे पकड़ाया.
भीगी पलकों और काजल से धुले हुए अपने गालों के साथ उसने मुझे देखा और थैंक्स दे
मारा. मैं अब भी चुपचाप खड़ा, अपने पत्रकार मन के सवालों को खुद ही आंसर करता हुआ
उसके हर आंसू के साथ बहता जा रहा था.
ऐसे वाकये मेरी जिंदगी में
कई बार हो चुके हैं. रोते हुए किसी को भी देखकर मैं फ्रीज हो जाता हूं. चाहे वो
कोई भी हो. फिर अगर आपका अपना हो, तो और ज्यादा इमोशनल होकर, कुछ एक बार तो साथ
में रो भी दिया हूं. अब इस बात की तस्दीक तो मेरे उन सो-कॉल्ड अपनों से ही की जा
सकती है. हां, लेकिन तजुर्बे से ये जरूर कह सकता हूं. कि आप चाहे जितने मर्जी आंसू
पोंछ लें सामने वाले के, इस कलियुग में इस बात की उम्मीद बाल भर भी मत रखिएगा कि
वो भी पलटकर आपके दुख में शरीक होगा.
बहरहाल, मैंने आदतन आंसुओं
के अगले ब्रेक में, मतलब जब वो पोंछ रही थी. उससे पूछ ही लिया, ‘पानी पिएंगी आप’. उसने मेरी तरफ देखा, मैं
फिर बोला, ‘जूठा नहीं है, पी लीजिए, मुझे अगले स्टेशन पर उतरना है.’ उसने हां में गर्दन हिलाई
और मैंने अपनी मिल्टन की नीली बोतल उसके हाथ में थमा दी. इतने में आवाज आई, अगला
स्टेशन आर के आश्रम है... मैं दरवाजे पर ही खड़ा था. दरवाजा खुला और मैं झटपट उतर
गया.
मेरे सारे सवाल मेरे पास ही
रह गए और उसके आंसू उसके पास. बस वो मेरी एक चीज भी साथ ले गई. मेरी मिल्टन वाली
नीली बोतल.

बहुत ही उम्दा... यूं महसूस हुआ कि जैसे में वहीँ पर हूँ... बोतल जरूर याद रखियेगा... कभी तो मेट्रो में फिर आएगी वो महिला! उसे लौटाने तो पूछ लेना... बाकी सवाल...
जवाब देंहटाएंधन्यवाद, घनश्याम भाई. बोतल तो ले भी ली. अगली कहानी में आएगा.. इंतजार कीजिए :)
हटाएंAisa laga kaise meri 10 saal purana kahan like rahe the....i can understand or can guess her feelings...may god bless her
जवाब देंहटाएंMe too. Can Guess. :(
हटाएंWah bahut badhia
जवाब देंहटाएंThanks.. Kya hum ek doosre ko jantey hain
हटाएंits really nice sir
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सेजल
हटाएं