मेसेज भेजना बंद कर दो
गए दिनों की बातें हो गई हैं, जब मिल बैठते थे तीन यार। दारू की बात नहीं, दिल की बात करने को, दारूबाज तो आज भी मिल लेते हैं। लेकिन आजकल तो हर रिश्ते और हर त्योहार का बंटाधार इस इंटरनेट पर मौजूद फ्री मेसेज सेवा ने कर डाला है।
जन्मदिन हो, त्योहार हो या फिर कोई बुरी खबर हो। संवेदनाएं, बधाई या फिर शुभकामनाएं सिर्फ एक मेसेज बन कर रह गई हैं। किसी दोस्त की टांग टूट गई हो तो उसके घर जाने की बजाए उसकी फेसबुक पर टूटी टांग वाली फोटो पर ऑऑऑ लिखकर सारा हालचाल उसी पर पूछ लिया जाता है। टूटी टांग वाला भी अब ऑनलाइन साइट और मेसेज सर्विस से मिलने वाली संवेदनाओं को ही रिअल मानकर काम चला लेता है।
कई झगड़े तो केवल इसी बात पर हो जाते हैं कि मैंने तुम्हे मेसेज भेजा पर नीले टिक होने के बाद भी तुमने उसका जवाब 2 घंटे बाद क्यों दिया ? आखिर ऐसा क्या जरूरी काम था जो पढ़ने के बाद 20 सेकेंड का जवाब टाइप करने का भी समय नहीं मिला।
वैसे ये मेसेज सर्विस इमोशंस को सप्लाई करने के लिए इमॉटिकॉन्स नाम की चीजों से भरी पड़ी है। ऑनलाइन साइट्स पर तो इनसे भी आगे शोले के गब्बर और बसंती से लेकर विदेशी मॉडलों की शक्लें और नाचने गाने और हंसने रोने वाले कई कार्टून कैरेक्टर मौजूद हैं। पर मेरा अपना ये मानना है कि आपकी बात, आपके होने या आपकी आवाज से बेहतर इमोशन्स के साथ कोई और नहीं समझा सकता।
कई लोगों के स्वर्ग चले जाने की वजह भी बन चुकी है ये इंटरनेट का फ्री वाली यमराज मेसेज सर्विस। सही पढ़ा आपने औऱ आपमें से कई तो रोज इसे करते ही होंगे। कार चलाते हुए मेसेज करते हुए लोग देखकर मुझे तो बहुत डर लगता है। ऐसे में कई लोग ऐक्सिडेंट में अपनी जान गंवा चुके हैं। सिर्फ कार चालक ही इस फ्री सर्विस के ग्राहक नहीं हैं।
सड़क क्रॉस करने से पहले पहले बाएं देखें, फिर दाएं और फिर एक बार बाएं देखकर सड़क क्रॉस कर लें। ये मम्मी ने बताया था बचपन में पर आज आप सड़क क्रॉस करते हुए लोगों को सिर्फ एक ही तरफ देखते हुए चलते देखते हैं। जिसे मर्डर केस से बचना हो, वो खुद अपनी कार सामने देखकर चलाए।
खैर इस पूरी कहानी का सार केवल यह है कि मेरे यार चल आज फ्री के मेसेज से दीवाली की बधाई का मोह त्याग कर। सीधे अपने दोस्त के घर चले जा। जेब को मत देख, कुछ पास में होना जरूरी नहीं, बस उसके घर के नीचे से आवाज लगाकर उसे नीचे बुलाकर गले लगाकर दीवाली मुबारक कहकर देख। तुम्हे खुद थोड़ा नॉर्मल महसूस होगा। मैं विदेश बैठे दोस्त से मिलने जाने की बात नहीं कर रहा, पता लगे बाद मेरे मेल पर फ्लाइट के बिल आने लगें।
क्योंकि अपन खुद गले मिलकर ही काम चलाने वाले हैं।

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