प्यार नहीं कर सकते.. सड़क पर ला देगा

ये साला फरवरी वैलेंटाइन-डे वाला महीना होता है। सबको लगता है कि यार कोई होती या होता। पर अपने को नहीं लगता। देखता हूं न, प्यार के पीछे आत्महत्या, हत्या, ऑनर किलिंग, तो लगता है, कि अपन तो ऐसे ही चंगे। पर मेरे पहले ऑफ़िस में एक वाकया हुआ, प्यार का एक किस्सा सुना था मैनें, लो सुनो, हां हां पढो। अभी शुरू भी नहीं किया, कि लगे गलती निकालने।

सर एक बात बताओ, आपकी तो कई गर्लफ्रैंड होंगी, आपसे कुछ पूछ सकता हूं। मेरे ऑफिस में काम करने वाले एक कर्मचारी ने कहा। रात के पौने एक बजे उसका यह सवाल चौंकाने वाला था, वो भी तब जब मैं बुखार में तप रहा था। मैं पलटा और कहा, अबे मेरी तो नहीं है कोई,  मेरा नंबर लेले, कोई अच्छी सी ढूंढ़ के दे दियो। तो कहता है, कि सर हमारे यहां तो ये चैनल नहीं आता। मैंने कहा, चल कोई नहीं, छोड़ मेरी, तू अपनी पूछ ले? तेरी तो होगी ही गर्लफ्रेंड !

पहले तो उसने थोडी न नुकुर की, फिर कहता है कि, सर पता है, मेरी एक गर्लफ्रेंड है। पर कल से उसने मुझ से बात करनी बंद कर दी है। अब मैं क्या करूं ? मैंने अपने आश्चर्च को कंट्रोल करते हुए, औऱ उसकी ओऱ देखते हुए कहा कि हुआ क्या, क्यों कर दी उसने बात बंद। तो जवाब आय़ा, कि सर बस उसके पापा को ससुर बनने की जल्दी है, वो अभी 12वीं में है। तो मैने पूछा कि उम्र क्या है उसकी। तो इस पर जवाब था, कि अभी जनवरी में 18 की हुई है। अब क्या कर सकते हैं, मैनें मन ही मन सोचा।

सर पता है आज का पूरा दिन मैं सो भी नहीं पाया, उसके स्कूल के बाहर गया था, अपने कुछ दोस्तों के साथ, पर वो तो स्कूल ही नहीं आई। मैनें कहा, अबे बात क्या हुई थी, तू तो कतई दोपहर वाला महिला प्रधान सीरियल होता जा रहा है, संसपेंस की दुकान। इस पर उसने कहा, कि सर क्योंकि उसे कल लडके वाले देखने आने वाले हैं, इसलिए मैनें उसे बता दिया कि मैं हाउसकीपिंग का काम करता हूं औऱ मेरी तन्ख्वाह कम है। अब उसकी तन्ख्वाह तो नहीं बताऊंगा मैं आपको। फिर कहने लगा, तो उसने फोन रख दिया, और अब तक उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा है। समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं। मैने कहा करना क्या है, अगर लडकी को तेरे पैसों से प्यार है, तो फिर तो तू उसे नमस्ते कर दे। हालांकि, तनख्वाह है ही कितनी तेरी, वो एक अलग बात है।

तो इस पर बेचारा भोला लडका बोला, सर नहीं उसे बिलकुल अपने पढे लिखे होने का घमंड नहीं है, मैने उसे बता रखा है, कि मैं अनपढ हूं। मैनें मन ही मन सोचा, फिर क्या वो लडकी इससे कलेक्टर होने की उम्मीद कर रही थी। बेचारा, परेशान है, कहता है, कि सर क्या दारू पीने से याद नहीं आती। मैनें कहा, यार मैनें तो ट्राई नहीं की, करके बताऊंगा।

फिर उसके बाद मैने उसके परिवार के बारे में पूछा, तो पता चला कि उसकी असली मां और बाप के बीच तलाक हो चुका है, और अब दोनों ही अलग-अलग शादी कर चुके हैं। लडका पहले घर से भाग गया औऱ फिर अब अपने पिता के साथ सौतेली मां के साथ रह रहा है। कहता है कि जब भी अपनी सगी मां से मिलने जाता हूं, तो मिलते हुए मुंह बनाती है, भगा देती है, उसका दूसरा बेटा, बडा सा मोबाइल लेकर घूमता है, सर हमने तो कभी हाथ में भी नहीं देखा ऐसा मोबाइल।

क्या सच में मां ऐसी होती हैं? मां-बाप के तलाक में बर्बाद हो गया बेचारा लड़का। अरे, अपने इस लडके को कम से कम पढा तो देती, बेचारा, कभी कंडक्टरी करता है, तो कभी सफाई का काम। कलियुग ही तो है ये। अपनी खुशी के आगे कुछ न देखना औऱ क्या होता है? अब अगर वो मां, कुछ सालों बाद आ कर माफी भी मांग ले औऱ कहे कि मैं तेरे साथ हूं बेटा, तो भी क्या उसकी ज़िंदगी के बीते साल लौटा पाएगी। वो परेशान, बदहाल बचपन की यादें मिटा पाएगी। मतलबी हो गया है प्यार, मां का भी।

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  2. aisa nahin hai, har ek insaan ek jaisa nahi hota, kisi insaan ki wajah se kisi rishte pe sawal uthana galat hoga, koi bhi rishata achha ya bura nahin hota, insaan achhe aur bure hote hain, jo insaan achhe hote hain wo har rishte ko pyar imandaari aur sachayi k sath nibhate hain, par jo insaan hi bure hote hain unse kisi bhi rishte ko nibhane ki umeed krna hi bekar hai. jo apne bachhe se pyar na kar saki wo maa hi nahin hogi, wo insaan ma ke rishte k kabil hi nahi hogi, par us insaan ki wajah se ma ki mamta par sawal nahin uthaya ja sakta.

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