१०० साल की हो चुकी दिल्ली ...पर आज बुखार भी आया है तो वो भी जापानी...
१०० साल की हो चुकी दिल्ली ...पर आज भी अपना कुछ भी तो नहीं है हमारे पास... बताइए बुखार भी आया है तो वो भी जापानी है..कभी चीन से आता है तो कभी जापान से... कोई मुझे ये बताये कहीं ये भी तो सरकार की छिपी हुई विदेश नीति के तहत तो नहीं हो रहा
डरते डरते जब मैंने डॉक्टर से पुछा की ये जापानी बुखार भारत मैं आखिर आया कैसे..तो वो हंस के कह दिए की बेटा globalisation का दौर है.. जब विदेशी निवेश हो सकता है... विदेशी कपडे पहन सकते हो... विदेशी भाषा बोलने मैं बुद्धिमत्ता आंकते हो..तो फिर भला जापानी बुखार से क्या परहेज़.. ठीक ही है... इसे भी वैश्वीकरण का एक हिस्सा ही मान लो... डॉक्टर साहब ज्ञान की अमृतवर्षा करते चले गए
फिर इसी बीच उन्होंने अपन रोना भी रो ही दिया... भला कौन मौका चूकता है आज की इस मौकापरस्त दुनियां मैं... बोले... बुखार ने भला तुम्हारा क्या बिगाड़ा है..वैसे भी कौन सा सभी बुखार मैं पड़ते ही चले आते हैं डॉक्टर के पास.. chemist से crocin या paracitamol तो तुमने भी कई बार मोल ली ही होगी...
थोड़ी देर बाद pose बदलते हुए.. ठीक मनोज कुमार जी की तरह.. philosophical होते हुए हर दीवाली मैं चीन का बना माल ही खरीदते हो... देखा नहीं क्या.. अब तो लक्ष्मी गणेश तक चीन से आते हैं...लगता है चीन ने अपने आपको किसी आडम्बर मैं बाँध के नहीं रखा है.. वो चुपचाप हिन्दू भगवानो को भी उतने ही प्रेम से बना कर बाज़ार मैं निकाल देता है.. जैसे की कोई सस्ता electronic सामान ...
पर दिल्ली को कहाँ इन सब बातों से फर्क पड़ता है जी.. दिल्ली तो दिलवालों की है.. दिमाग से हम न सोचते हैं .. और न ही कभी सोचेंगे.. कभी अन्ना की बयार चलेगी.. कभी रामदेव का आसन ... कभी पेट्रोल के दाम और महंगाई को लेकर भाजपा प्रदर्शन करेगी..जाम लगाएगी...तो कभी हम खुद ही भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान को कोई मैच हरा देने पे सड़कों को जाम कर देंगे...
दिल्ली का दिल बहुत बड़ा है...हम सब सुबह अखबार पढ़कर.. या न्यूज़ चैनल देखकर.. अपने देश को कोसते हैं...या फिर तेंदुलकर के १००वै शतक के इंतज़ार मैं घर जल्दी आकर चाय लपेटते हैं.. बस सब कुछ जैसा है वैसे ही चलने देते हैं.. tention लेने का नहीं.. इसीलिए जापानी बुखार हो ...या चीनी माल सब चलता है...
ये तो पता नहीं चल पाया के ये जापानी बुखार आया कहाँ से.. पर हाँ डॉक्टर साहब की बात से दिल्ली की तबियत वक़्त बेवक्त इतनी बिगडती क्यूँ रहती है... इसका पता ज़रूर चल गया...
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